Mahatma Gandhi Biography in Hindi | महात्मा गांधी की जीवनी

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आज के इस आर्टिकल महात्मा गांधी का जीवन परिचय Mahatma Gandhi Biography in Hindi में बताएंगे। आप इस जीवनी को पढ़कर बापू के बारे में काफी कुछ जान सकेंगे।

आइये पढ़ते हैं महात्मा गांधी की जीवनी Mahatma Gandhi Biography Hindi में।

Mahatma Gandhi Biography in Hindi | महात्मा गांधी की जीवनी हिंदी में

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महात्मा गांधी का जीवन परिचय

महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। उनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम कुटलीबाई गाँधी है। महात्मा गांधी के पिता करमचंद गाँधी ने चार शादी कियी थी जिसमे उनकी माँ चौथी पत्नी थी।

महात्मा गाँधी जी के पिता को अंदाजा भी नहीं होगा की उनकी चौथी पत्नी का छोटा बेटा देश के स्वतंत्रता में अपनी बड़ी भूमिका निभाएगा। महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 में गुजरात के एक पोरबंदर शहर में हुआ था। उनके पिता करमचंद गाँधी पंसारी नाम के जाती से संबंध रखते थे। वो एक काठियावाड़ रियासत के प्रधान मंत्री थे। महात्मा गाँधी जी की माँ कुटलीबाई गाँधी एक वैश्य समुदाय की थी।

उनकी माँ अपना ज्यादातर समय मंदिर में बिताते थे। उन्होंने कभी भी किसी वस्तु को महत्व नहीं दिया।भक्ति करने वाली माता के कारण और वाह के जैन समुदाय की परंपरा के कारण महात्मा गाँधीजी को अच्छे संस्कार मिल रहे थे जिससे वो शाकाहारी जीवन, विभिन्न जातीय में मिलकर रहते थे।इसका उन्हें आगे जाकर बड़ा फायदा हुआ।

महात्मा गाँधीजी के पीढ़ी में विवाह बचपन में किया जाता था। और उनका विवाह भी बहुत काम आयु में किया गया था जबकि उनकी आयु तब सिर्फ १४ साल थी।

गाँधी जी के पत्नी का नाम कस्तूरबा बाई मकनजी के साथ हुआ। उनको प्यार से बा कहके पुकारते थे। १८८५ में गाँधी जी को पहली संतान हुई थी पर वो कुछ ही दिन जीवित रहा और इसी साल उनके पिता करम चंद गाँधी का निधन हुआ ।

बाद मे महात्मा गाँधी और कस्तूरबा गाँधी को चार बच्चे हुए थे जिनका नाम हरी लाल गाँधी, मणि लाल गाँधी, रामदास गाँधी में और देवदॉस गांधी था।

महत्मा गाँधी जी के शिक्षा के बारे मे :-

पोरबंदर में शिक्षा की अच्छी सुविधा नहीं होने के कारण उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा मुश्किल परिस्थिति में पूरी कि। उन्होंने मिट्टी में उंगलिओ से उकेरी के अंग्रेजी में वर्ण माला सीखी। मोहन दास शैक्षिक स्थरपे एक अच्छे विद्यार्थी थे। 1887 में उन्होंने अपनी मेट्रिक का एग्जाम पास किया।

मोहन दास का सपना था की वो डॉक्टर बने पर वो एक वैश्य परिवार से होने के कारन वो डॉक्टर नहीं बन सकते थे। इसलिए उनका परिवार चाहता था की वो एक अधिकारी बने और इसके लिए उन्हें बैरिस्टर की पढाई करनी थी।

वो यह सुनते बहुत प्रसन्न हुए की बैरिस्टर बनने के लिए इंग्लैंड जा रहे हे पर उनके पिता कुछ ज्यादा पैसे छोड़कर नहीं गए थे। इसलिए उनके भाइयों ने मेहनत करके थोड़े पैसो का इंतजाम किया और ईस्वी सन 1888 में गाँधी जी इंग्लैंड के लिए रवाना हुए।

इंग्लैंड में जाकर महात्मा गाँधी जीने वहा के रीति रिवाज का अनुभव लिया हांलाकि अपनी माँ को दिए वचन के अनुसार उन्होंने कभी मांसाहारी भोजन को हाथ तक नहीं लगाया।

गांधी जी का साउथ अफ्रीका जाना

गाँधी जी जिन शाकाहारी लोगो से मिले उनमे से कुछ थियोसोफिकल सोसायटी के थे। थियोसोफिकल यह ग्रीक भाषा के शब्द से बना हे जिसका अर्थ हे हिन्दू धर्म की ब्रम्हविद्या।

इस सोसाइटी की स्थापना 1875 में विश्व बन्धुत्व को प्रबल करने के लिये हुई थी। फिर पढाई पूरी होने के बाद वो 1892 में भारत लोटे और उन्होंने वकालत में अपनी जगह बनाने की शुरुवात किये। किंतु उन्हें वकालत करने में अच्छी सफलता नहीं मिली। क्योंकि जब उन्होंने अपना पहला केस लिया तब वो गवाह के सामने कुछ बोल नहीं सके और वो कोर्ट छोड़ के बाहर आ गए।

फिर भी लॉयर के रूप में संघर्ष करने के बाद उन्हें अफ्रीका से लीगल सर्विस का एक साल का कॉन्ट्रैक्ट मिला जिसे गाँधी जी ने मान्य किया और वो अप्रैल 1893 में साउथ अफ्रीका के लिए रवाना हुए ।

रंगभेद के खिलाफ गांधी जी की आवाज़

वह उन्हें रंग भेद का सामना करना पड़ा और डरबन के कोर्ट में उन्हें उनकी पगड़ी हटाने के लिए कहा गया जिसे उन्होंने साफ मन किया और वो कोर्ट छोड़ के चले आए। वहाँ पे उन्होंने बहुत भेद भाव का सामना किया जैस एक बार उनके पास ट्रैन सफर करते समय पहली श्रेणी का टिकट होने के बावजूद उन्हें तीसरी श्रेणी के डिब्बे में जाने के लिए कहा लेकिन उन्होंने जाने से इनकार किया तो अगले स्टेशन धक्के मारकर उन्हें बाहर फेक दिया।

यह अपमान उन्हें बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने खुद को रंग भेद के खिलाफ लड़ने के लिए तैयार किया। इस परिस्थिति से लड़ने के लिए गांधीजी ने इंडियन कांग्रेस पार्टी की स्थापना करी और कॉन्ट्रैक्ट के 1 साल पूरे होने के बाद वो भारत वापस लौट आनेकी तैयारी शरु करदी।

जब वो भारत आने के लिए तयार हो रहे थे तभी मिडिल असेंबली ने भारतीय को वोटिंग करनेसे वंचित कर दिया।इस समय उनके साथियों ने उन्हें इस परिस्थिति से लड़ने के लिए आश्वस्त किया। तब गांधीजी ने इस मुद्दे को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पे उठाया। कुछ दिन भारत में रुकने के बाद वो अपने परिवार सह साउथ अफ्रीका लौट गए।

वर्ल्ड वॉर में अंग्रेजों की मदद व सत्याग्रह आंदोलन

वर्ल्ड वॉर के समय उन्होंने ब्रिटिश सरकार की मदद की थी। उनका मानना था की अगर भारतीय ब्रिटिश सरकार में अपनी नागरिकता चाहते है तो उने अपने कर्तव्य पुरे करने होंगे। गाँधी जी ने अपनी जीवन की पहली रैली 1906 में साउथ अफ्रीका में भारतीयों के नागरिकता के लिए निकाली थी।

और इस अहिंसा रैली को उन्होंने सत्याग्रह का नाम दिया।और इसलिए कुछ समय के लिए उन्हें जेल हुई। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार ने भारतीयों के ऊपर लगाए पाबंदी के कारन किया था।जिसमे हिंदु विवाह को नहीं मानना भी शामिल था।बादमे इस समझोते को सरकार ने मान्यता दे दी ।

गांधी जी का चंपारण आंदोलन

1918 ने ब्रिटिश लैंड लॉर्ड्स के खिलाफ चंपारण सत्याग्रह का आंदोलन शुरू किया। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के भारतीय को निल के खेती के लिए लगाए हुए प्रतिबंध के लिए गया था। और इस अहिंसक आंदोलन में गाँधी जी की जीत हुई। ऐसे बहुत सारे अहिंसक आंदोलन गाँधी जी ने लोगो के लिए किये थे और इसके लिए उन्हें कहिबार जेल में जाना पड़ा था ।

1919 में जब गाँधी जी राजनैतिक आंदोलन आकर रहे थे तब रॉलेट एक्ट आया था उसमे क्रान्तिकारियों को सीधा गोली मारने का आर्डर था और तभी अमृतसर में ब्रिटिश के अधिकारी के आर्डर पे सैकड़ों भारतीयों पर गोली चलायी थी।

गांधी जी का स्वदेशी आंदोलन व नमक कानून विरोध

फिर गाँधीजी ने नाराज हो करअग्रेंजो के संपूर्ण बहिष्कार का आव्हान किया जिसमे ब्रिटिश द्वारा बनाये गए सामान को नहीं ख़रीदे, टैक्स न भरने के लिए लोगो को प्रेरित किया ।और खुद गाँधी जी ने चरखा लगाके खादी तयार करने में ध्यान केंद्रित किया।

तभी 1930 में गाँधीजी ने ब्रिटिश सरकार के नमक आंदोलन को विरोध किया। जिसमे इस एक्ट के तहत भारतीय नहीं नमक बना सकते और नहीं बेच सकते थे ।इसके लिए गाँधी जी ने नमक का सत्याग्रह किया था और वो 390 किलोमीटर चलके अरेबियन सागर तक चलके गए और प्रतिकार रूप से नमक को बनाकर ब्रिटिश सरकार के नियमो को तोडा था। इसके लिए 60000 भारतीयों को कारावास में डाला गया था। और गाँधी जी के इस आंदोलन के लिए उन्हें कई ख़िताब से नवाजा गया था।

गांधी जी का जीवन परिचय | गांधी जी की जीवनी | Mahatma Gandhi Biography in Hindi

तो दोस्तों यह थी महात्मा गांधी की जीवनी, महात्मा गांधी के बारे में। उम्मीद है आपको ये महात्मा गांधी बायोग्राफी हिंदी में (Mahatma Gandhi Biography Hindi) पसन्द आयी होगी।

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