कांशी राम की जीवनी | Kanshi Ram Biography in Hindi

कांशी राम की जीवनी (Biography of Kanshi Ram in Hindi):- आप ने कभी ने कांशीराम जी के बारे ने कही कही ने जरूर से सुना ही होगा। कांशी राम जी भारत के प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ थे, इसके साथ साथ ये एक समाज सुधारक भी थे।

इन्होंने अपने जीवन बहुत सारी सफलताएं पाई थी, और भारत मे एक समाज सुधारक के रूप में कार्य भी किया था। आज हम आपको कांशी राम की जीवनी (Biography of Kanshi Ram in Hindi) के बारे में ही बताने वाले है।

कांशी राम का जीवन परिचय हिंदी में | Kanshi Ram Biography in Hindi

कांशी राम की जीवनी – Kanshi ram Hindi Biography

कांशी राम भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक थे। इन्होंने अपना पूरा जीवन अछूतों और दलितों के राजनीतिक एकीकरण तथा नैतिक उत्थान दिलाने के समर्पित कर दिया था।

इन्होंने वर्तमान समय मे निचले व पिछड़े वर्गों के विकास के लिए एक इस प्रकार का मंच तैयारी किया था, जहाँ पर इस वर्ग लोग अपनी सभी प्रकार की समस्या को बहुत ही आसानी से रख सकते थे।

कांशी राम ने इस मंच को तैयार करने अपने जीवन मे बहुत सारे कार्य किए थे, पर सभी कार्यो में से सर्वश्रेष्ठ कार्य बहुजन समाज पार्टी की स्थापना का था।

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कांशी राम ने लगभग अपना पूरा जीवन निचले व पिछड़े वर्ग के विकास व उन्नति में ही लगा दिया था। इन्होंने अपने पूरे जीवन मे कभी भी किसी भी स्त्री से शादी नही की थी और पूरे जीवन भर पिछड़े वर्ग लोगों का विकास करने व उन्हें मजबूत बनाने में समर्पित कर दिया था।

कांशी राम का प्रारंभिक जीवन :-

भारत के प्रसिद्ध समाज सुधारक कांशी राम का जन्म 15 मार्च 1934 को पंजाब के रोरापुर गाँव मे हुआ था, इनका जन्म एक रैदासी सिख परिवार में हुआ था।

कुछ समय के बाद कांशी राम ने अपने इस धर्म को छोड़कर के सिख धर्म को अपना लिया था। कांशी राम के पिता के तीन बेटे व चार बेटियां थी, जिनमे से कांशी राम सबसे बड़े थे।

कांशी राम ने अपने जीवन मे सभी भाई व बहनो से ज्यादा शिक्षा ग्रहण की थी, और इसके अलावा कांशी राम ने अपने जीवन मे कभी भी किसी भी स्त्री से शादी नही की थी।

जीवन के अंतिम चरण में कांशी राम को मधुमेह और उच्च रक्तचाप की बीमारी हो गई थी, जिसके कारण सन 1994 में इन्हें एक बार दिल का दौरा भी पड़ा था। इसके बाद में सन 2003 में कांशी राम को एक बार दिल का दौरा भी पड़ा था। कांशी राम पूरी तरह से बीमारी से ग्रसित हों गए थे।

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जिसके कारण 9 अक्टूबर 2006 को उन्हें फिर एक और दिल का दौरा पड़ा। जिसके कारण इनकी मृत्यु हो गई


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कांशी राम की शिक्षा :-

कांशी राम ने अपने में प्रारम्भिक शिक्षा पंजाब से प्राप्त की थी। इसके बाद इन्होंने पंजाब के ही एक कॉलेज से बी एससी की पूर्ण पढ़ाई पर्याप्त की थी और इसके बाद में इन्होंने स्नातक तक कि पढ़ाई की थी।

बाद में सन 1958 कांशी राम को पूना में रक्षा उत्पादन विभाग में एक सहायक वैज्ञानिक के पद कार्य करने की नौकरी भी मिली थी कुछ समय के बाद में इन्होंने एक समाज सुधारक के रूप में कार्य किया था।

कांशी राम जी का कारोबार :-

कांशी राम ने सबसे पहले सन 1965 में डॉ अम्बेडकर के जन्मदिन पर दी जाने वाली सार्वजनिक अवकाश को रद्द करने के लिए बहुत ज्यादा विरोध किया था।

इसके बाद में इन्होंने बहुत सारे समाज सुधारक से सम्बंधित कार्य किए थे और पिछले, दलितों और पीड़ित वर्गो के समाज के लोगो की मदद करने में लग गए थे।

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इन्होंने अपने डॉ भीमराव अंबेडकर की जातिवादी प्रथा और इनके द्वारा किये गए सभी कार्यो बहुत ही ज्यादा गम्भीरता से अध्ययन किया था।

इसके बाद में कांशी राम ने सन 1971 में अपनी नौकरी भी छोड़ दी थी और फिर दलित व पिछड़े वर्ग के लोगो की मदद करने में लग गए थे।

कांशी राम ने अपने एक दोस्त के साथ मे मिलकर के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यक कर्मचारीयो की मदद करने के लिए कल्याण संस्था की स्थापना की थी।

आगे चलकर कांशी राम ने इस संस्था को पूना परोपकार अधिकारी कार्यालय से भी पंजीकृत करा लिया था। वैसे तो इस संस्था का निर्माण पीड़ित व पिछड़े वर्ग के कर्मचारियों पर होने वाले शोषण को रोकने व उन्हें समाधान दिलाने के लिए किया गया था,

लेकिन इस संस्था का मुंख्य उद्देशय भारी के लोगों को शिक्षित और जाति प्रथा बे बारे में सम्पूर्ण जानकारी देकर उन्हें जागरूक बनाना था।

कुछ ही समय मे इस संस्था का बहुत ही अच्छे तरह से विकास होने लगा और बहुत सारे लोग इस संस्था से जुड़ने लग थे।

फिर कुछ ही समय बाद में कांशी राम व उनके दोस्तों ने साथ मे मिलकर के सन 1973 में BAMCEF (बेकवार्ड एंड माइनॉरिटी कम्युनिटीस एम्प्लोई फेडरेशन) नामक एक नई संस्था का निर्माण किया था।

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इस संस्था का पहला कार्यक्रम सन 1976 में दिल्ली शहर में शुरू किया गया था। BAMCEF संस्था की टैग लाइन “एड्यूकेट ओर्गनाइज एंड ऐजिटेट” थी।

BAMCEF संस्था ने डॉ भीमराव अम्बेडकर के सभी विचार व उनकी मान्यताओ को भारत के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुचाने के कार्य सबसे ज्यादा बल दिया था। इ

सके बाद में कांशी राम जी समाज सुधारक के कार्य को और ही अच्छे तरीके से करने लग गए थे। कांशी राम ने जाति प्रथा, उपज और अम्बेडकर के विचारों के बारे में लोगो को जानकारी देकर उन्हें जागरूक करने का कार्य करने लगे थे।

वह सब जगह पर अपनी बातों का प्रचार करते थे जिसके कारण उन्हें लोगो का बहुत ही ज्यादा समर्थन मिलने लग गया था।

कांशी राम एक समाज सुधारक के रूप में :-

कांशी राम में एक समाज सुधारक के रूप में सन 1980 को “अम्बेडकर मेला” के नाम से एक पैदल यात्रा शुरू की थी,

जिसमे वो अलग अलग जगहों पर जाकर के लोगो को डॉ भीमराव अम्बेडकर के जीवन और विचारों को एक चित्रों और कहानी रूप में बताते थे और उन्हें जागरूक करने का कार्य करते थे।

इसके बाद में सन 1984 में कांशी राम ने BAMCEF के जैसी ही एक और संस्था की स्थापना की थी जिसका नाम दलित शोषित समाज संघर्ष समिति रखा गया था।

जिन लोगो पर पर जाति प्रथा के बारे में जानकारी देकर उन्हें जागरूकता फैलाने के लिए हमले किए जाते थे उन सभी लोगो की मदद दलित शोषित समाज संघर्ष समिति करती थी।

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इन सब के बाद में कांशी राम ने सन 1984 में एक भारत के प्रसिद्ध राजनैतिक दल का निर्माण किया था जिसे आज हम सभी लोग बहुजन समाज पार्टी के नाम से जानते है।

इसके बाद ने सन 1986 उन्होंने अभी सभी संस्थओं में कार्य करना बंद कर दिया था अब वो सिर्फ बहुजन समाज पार्टी के लिए ही कार्य करते थे।

कांशी राम अपने भाषणों के माध्यम से कहते है, कि यदि कोई भी सरकार किसी भी प्रकार का वादा करती है, तो उसे पूरा जरूर से करना चाहिए नही तो उसे स्वीकार नही करना चाहिए क्योकि उनमे वादों को पूरा करने की क्षमता नही होती है।

कांशी राम का राजनीति क्षेत्र में योगदान :-

कांशी राम जी एक प्रसिद्ध समाज सुधारक होने के साथ साथ एक अच्छे राजनीतिज्ञ भी थे इन्होंने अपने जीवन मे राजनीति के क्षेत्र में भी बहुत ज्यादा योगदान दिया है।

इन्होंने अपने राजनैतिक कार्यो कि मदद से पिछड़े व दलित वर्गो के लोगो की मदद के लिए बहुत सारे कार्य किए है और उन्हें अपनी समस्याओं को सबसे सामने रखने के लिए एक मंच भी प्रदान किया।

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कांशी राम ने अपनी बहुजन समाज पार्टी का विकास उत्तर प्रदेश सही और भी बहुत सारे उत्तरी राज्यों जैसे मध्य प्रदेश और बिहार में किया था और यहाँ की निचली, पिछड़ी और दलित वर्ग के लोगो व कर्मचारियों को शोषण से बचाने व उन्हें मजबूत बनाने के लिए बहुत सारे प्रयास किये थे।

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